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Dharm Guru

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत, अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्ध, र्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे

अर्थ : जब जब इस धरती पर, धर्म की हानि होती है, एवं अधर्म मैं वृद्धि होती है, तब तब साधुओं, की रक्षा करने के लिए , और दुष्टों का संहार करने के लिए, और धर्म की पुनर्स्थापना करने के लिए, मैं इस पृथ्वी पर जन्म लेता हूँ

मुझे पता है, कि आप सभी ने, ये श्लोक अपने जीवन मैं, लाखों बार सुना है, पढ़ा है, इसका अर्थ भी जानते हो, पर मुझे शंका इस बात की है, कि आप इसका वास्तविक अर्थ जानते हो, या वह अर्थ जानते हो, जोकि हमें, ढ़ोगियों द्वारा समझाया गया है, जी हाँ, चौंकिए नहीं, दोनों अर्थों मैं, बहुत अंतर है, यदि आपको इसका वास्तविक अर्थ पता होता, तो परमात्मा के प्रति, आपके मन मैं, जो शंकाएं हैं, वो नहीं होतीं, लोग इतने बहरूपिये नहीं होते, समाज मैं इतनी भीषण अव्यवस्थाएं नहीं होतीं, एक बार, किरदारों के नाम के साथ, इस श्लोक का अर्थ, पुनः समझने का प्रयास करने के लिए, यहाँ Click करें

विश्वभर की तुलना मैं, हमारी संस्कृति के पिछड़ने का, क्या कारण है ?

लगभग 2000 बर्ष की, गुलामी मैं, हमें हमारी, धार्मिक पुस्तकों से दूर रखा गया, बड़े बड़े संग्रहालय जला दिए गए, या अक्रान्ता, उन बहुमूल्य पुस्तकों को, अपने देश के ले गए, इसके बाद हमारे अपनों ने ही, हमें इतना भ्रमित किया, कि हम अपने ज्ञानमार्ग से, उलटे रास्ते तय करने लगे, मैं यहाँ आपको सिर्फ यही बताना चाहता हूँ, कि पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत, भारत की पवित्र भूमि से हुई है, इसके साक्ष्य भी प्रस्तुत हैं, सारा ज्ञान, विज्ञान भारत की भूमि से उपजा है, भारत ही, सारे अविष्कारों की जननी है, फिर भी हम, अन्य मुल्कों से पीछे हैं, इसका कारण है, कि हमें ऐसा बनाया गया है, अविश्वासों, चमत्कारों के ओतप्रोत रखकर, हमें गुमराह किया गया है, तो चलिए आज हम यहाँ, जीवन की कुछ कड़वी सच्चाइयों पर नजर डालते हैं, ये कड़वी इसलिए लगेंगी, क्योंकि सच्चाई है, अतः आप इन्हें तब ही समझने का प्रयास करें, जब खुद को भूलने की कला आती हो, खुद को भूलना अर्थात “मैं” को त्यागना,

प्रकृति के 3 गुण

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प्रकृति के, 3 गुण, सत्व, रजस और तमश, ये प्रायः जीव की, बुद्धि के 3 स्तर हैं, ये तीनों गुण, एक ही व्यक्ति मैं पाए जाते हैं, मुझमें भी और आप मैं भी, स्वयं के, गुणों की जांच करने के लिए, बटन पर क्लिक करें

आत्मा के 3 गुण

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आत्मा के 3 गुण, हमें उम्र के हर पड़ाव पर, अपनी आदतें और व्यवहार बदलने की, प्रेरणा देते हैं, जीवन मैं, परिवर्तन का नियम स्थापित करते हैं, कौन से हैं ये 3 गुण, जानने के लिए, नीचे दिए बटन पर क्लिक करें

जीवन के 3 योग

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कोई भी व्यक्ति, इस पृथ्वी पर, 3 प्रकार से जीवन व्यतीत कर सकता है, और तीनों प्रकार से, जीवन जीने पर, मुक्ति को प्राप्त होता है, तो कौन से हैं ये 3 प्रकार, इन्हें जानने के लिए, नीचे दिए, बटन पर क्लिक करें

ईश्वर कौन है ?

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क्या ईश्वर, किसी ऐसी शक्ति का नाम है, जिसके भय के कारण, हम जप, तप, नियम संयम जैसी कठिन दिनचर्या अपनाते हैं, और इसे follow न करने पर, मृत्यु के बाद, हमें नर्क प्राप्ति होगी, या फिर कुछ और मतलब है, जानने के लिए, बटन पर क्लिक करें

परमात्मा कौन है ?

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जीवित रहते, पापात्मा या पुण्यात्मा, सभी “परमात्मा” से मिलना चाहते हैं, परन्तु पाना, कोई नहीं चाहता, परमात्मा से मिलना आसान है, यदि कोई मिलने के बजाय, उसे पाने का प्रयास करे तो, परमात्मा के रूप/ स्वभाव जानने के लिए, बटन क्लिक करें

भगवान् कौन हैं ?

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भगवान् राम, भगवान् कृष्ण, नानक बुद्ध और जीसस, इन सबको भगवान कहा जाता है, जबकि ये सभी गृहस्थी मंद, पारिवारिक व्यक्ति थे, जिन ऋषियों ने, जीवन भर जंगलों मैं, तपस्या की, उन्हें भगवान् क्यों नहीं कहा जाता, जानने के लिए, बटन पर क्लिक करें

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