क्या हमें, Meditation करना आता है ?

Meditation करना, अर्थात ध्यान लगाना, ये तो हम सभी जानते हैं, परन्तु बर्षों से, हमारी संस्कृति मैं, प्रचलित रहा ये शब्द, भ्रम और कुरीतियों के कारण, अपने अर्थ से, कहीं अलग बिछड़ गया, दरअसल जैसा कि हम बोलते हैं, ध्यान लगाना, इस शब्द को, Pronounce करने के साथ ही, भ्रम के शिकार हो जाते हैं, क्योंकि हम Pronounce करते हैं, ध्यान लगाना, जबकि इसका सही अर्थ है, ध्यान हटाना, जी हाँ, जिन बातों से लोभ, मोह, क्रोध का जन्म हो, ऐसी सांसारिक बातों से ध्यान हटाना,,,क्योंकि आज के तार्किक युग मैं, हमारे मन (Internal Storage ) मैं, पूरे दिन, इसी से सम्बंधित विचार तो चलते रहते हैं, जिसके द्वारा हम, पूरे दिन बेचैन रहते हैं, कल्पनाओं मैं खोये रहते हैं, कोई इक्षा पूरी हो गई तो भी, नहीं पूरी हुई तो भी, दोनों स्थति मैं, बाहरी दुनिया से अलग, थलग रहते हैं, सिर्फ अपनी कल्पनाओं मैं, खोये रहते हैं

Guided meditation | ध्यान के निर्देश | ध्यान क्रिया | best guided meditation

जैसा कि हमने बताया, कि इस शब्द का उच्चारण ही गलत है, ध्यान लगाना सही शब्द नहीं, सही शब्द है, ध्यान हटाना, परन्तु हम सभी की परेशानी है, कि ध्यान हटाया तो जा सकता है, पर हटा के, कहीं और लगाना भी आवश्यक है, और जहाँ भी, अपना ध्यान लगाया जायेगा, ये उसी पर परिकल्पना करता रहेगा, निरंतर परिकल्पना ही तो, बेचैनी का कारण है,

Meditation for beginners | ध्यान की शुरुआत

Meditation for beginners : अतः ध्यान की शुरुआत करने के लिए, सबसे पहले आप, अपने आप को सहज मुद्रा मैं लाईये, फिलहाल के लिए, अपने विचारों का, त्याग कर दीजिये, मात्र कुछ पल के लिए ही सही, अपने जीवन के कर्म, एवं फल, या अपने संघर्षों को, भूल जाइये, जिस Maturity को, आप अपनी बुद्धिमानी से जोड़ते हैं, जैसे भावनाओं का उत्सर्जन, शरीरिक नियंत्रण इन सबको समाप्त कर दीजिये, कम यादों वाले, छोटे बच्चे की भांति एहसास कीजिये, या उन दिनों को याद कर लीजिये, अब चिंतन कीजिये क्या उस उम्र मैं भी आप, इतनी ही गहनशीलता से जीते थे, भविष्य की सोच को लेकर इतने व्याकुल थे ? क्या चेहरा इतना ही, लटका हुआ था ???? शायद नहीं, दरअसल हम अपनी बढ़ती उम्र से नहीं, बल्कि अपनी यादों के बोझ से परेशान हैं, अपने मन से परेशान हैं, मन की कार्यप्रणाली को, समझने के लिए, हमने एक लेख भी लिखा है, नीचे लिंक पर Click करके, आप उसे पढ़ सकते हैं

दरअसल ये विचारों की द्रढ़ता, इनका बोझ ही, हमें भूत या भविष्य की कल्पनाओं मैं, उलझाए रखता है, भय / उम्मीदें / सुंदर भविष्य / ज्यादा संसाधनों का प्रयोग / ये सब मात्र कल्पनाएं ही तो हैं, जो आपको वर्तमान अवस्था से दूर कर देती हैं, नया सीखने या जानने को, प्रेरित नहीं करती, वर्तमान स्थिति से जुड़े, निर्णय लेने मैं, बाधा उत्पन्न करती हैं, इसीलिए बार बार हम अपनी संतानों को, हमारे भूतकाल के निर्णय के आधार पर ही, नये निर्णय लेने को बाध्य करते हैं, हो सकता है, कि कहीं तक आपके आधार सहीं हों, परन्तु आपको समय की परिवर्तनशीलता पर भी ध्यान देना चाहिए, पहले के और आज के समय मैं, जीवन की कई जरूरतें और आधार भी बदल गए हैं, इसे भी समझना चाहिए, उनके जीवन के कुछ निर्णय, उन्हें स्वयं लेने दीजिये, ताकि उनके अनुभवों मैं, वृद्धि हो

Shoonya meditation | sahaja yoga meditation | मुक्ति | sahaj samadhi meditation

अतः जब आप अपनी कल्पनाओं के विकारों को त्यागकर, जीवन के सहज स्वरूप को पाने का प्रयास करेंगे, ऐसी स्थिति मैं आपका मन नष्ट हो जायेगा, अतः इस मन की नष्टता को ही ध्यान कहते हैं, जब मन नष्ट हो जाएगा, तो निरंतर विचार बनाते रहने की, इस प्रक्रिया से, आजादी मिल जाएगी, इस आजादी को, अर्थात शून्यता को ही, “मुक्ति” कहते हैं, जैसा कि हम सबने सुन रखा है, कि “मुक्ति” मरने के बाद मिलती है, मूर्खतापूर्ण बातें हैं ये सब, जो समाज के ढोंगियों द्वारा, हमारे मन ( Internal Storage ) मैं, Pan drive द्वारा, कूट कूट के भर दी गई हैं, ये इतनी जटिल हैं, कि इनकी सच्चाई जानने मैं, इन्हें कुरेदने मैं भी, हमें डर लगता है, अब खुद सोचो, धर्म यदि इतना कमजोर हो, कि उसकी प्रमाणिकता प्रकट करने मैं, डर का एहसास हो, तो निश्चित ही वो अधर्म होगा, यदि मृत्यु के बाद ही मुक्ति मिलती है, तो जीवन मैं, इतनी कड़ी मानवीयता का पालन / इतनी जिम्मेदारी / इतनी बुद्धिमानी / या इतने संघर्षों का क्या मोल,
क्योंकि इस तरह तो इंसान के अलावा भी, प्रत्येक जीव जंतु / कीट / पशु ,,, सभी को मुक्ति मिलती है, पर नहीं ऐसा नहीं है, विचार बनाने की प्रक्रिया से “मुक्ति” पा लेना ही, वास्तविक “मुक्ति” है

meditation | ध्यान की क्रियाएँ

Meditation

तो चलिए, अब अपने Point पर आते हैं, ऐसी कौन कौन सी क्रियाएं हैं, जिनके द्वारा, अपने मन को नियंत्रित किया जाए, इस मन को कहाँ लगाया जाय ?
तो मैं बताना चाहूंगा, कोई भी ऐसी क्रिया, जिसमें आप अपने विचारों को बंद कर, बुद्धि का प्रयोग करना शुरू कर दें, वही क्रिया Meditation अर्थात ध्यान कहलाती है, इसे सामान्य लफ्जों मैं समझिये — ध्यान बुद्धि का परिमानक है, और विचार मन का

बचपन मैं, अध्यन के समय मैं,, हमें दोनों चीजों की आवश्यकता होती है, बिषय को समझने के लिए – ध्यान की आवश्यकता है, उसे याद करने के लिए, मन (Internal storage ) की
मेरा तात्पर्य ये नहीं, कि जीवन मैं, मन का प्रयोग वर्जित है, अपितु मैं ये कहना चाहता हूँ, कि मन पर नियंत्रण आवश्यक है, अभी आपका मन अनियंत्रित रहता है, आप अपने हाथ मैं, फ़ोन को पकड़कर घंटों, कान पर लगाकर बात कर सकते हैं, आपका “हाथ” स्थिर रहेगा, परन्तु बात करने के दौरान भी, ये मन अनियंत्रित रहता है,

Meditative mind | ध्यानस्थ दिमाग | ध्यान की स्थति

कैसा होता है, Meditative mind अर्थात ध्यानस्थ दिमाग ?
तो आइये यहाँ ध्यानस्थ दिमाग की स्थिति को जानने का, इसे समझने का प्रयास करते हैं, वह दिमाग जो भूतकाल के अनुभवों से और भविष्य की चिंताओं से अलग, यानि वर्तमान मैं स्थिर होगा, वर्तमान मैं जो घटित हो रहा है, उस कर्म मैं पूर्णतयः तल्लीन होगा, और कर्मफल से निश्चिंत होगा, वही होगा ध्यानस्थ दिमाग ( Meditative mind ),,
ऐसे व्यक्ति के चहरे पर, मुस्कुराहटों के फूल होंगे, ललाट पर चमक होगी, उसे देखकर ऐसा लगेगा कि, उसने सब कुछ पा लिया, वह अपनी जिंदगी से अत्यंत खुश प्रतीत होगा, दरअसल ये सभी अंदर के भाव हैं, जो चहरे पर दिखाई देते हैं,, ये विशेषताएं व्यक्ति के चरित्र मैं, मोह लोभ जैसे, रिक्त स्थान, भर जाने के बाद आती हैं,
ऐसे व्यक्ति सभी के साथ बिना लोभ के, सम्बन्ध रखते हैं,

Meditative mind Holder| ध्यानस्थ दिमाग वाले

अब आप कहेंगे, कि मैंने बातें तो बड़ी बड़ी कर दीं, पर ऐसा कोई दिखाई नहीं देता, तो उदाहरण के तौर पर, अपने आस-पास 10 बर्ष की आयु तक के, बच्चों को देखिये,
देखिये जब वो खेल रहे होते हैं, तो कितनी तल्लीनता होती है, समझिये उनमें कुछ नया सीखने की, कितनी ललक होती है, इसका मूलभूत कारण यही है, कि उनके दिमाग मैं, आपकी तरह, जिम्मेदारी की / Maturity की / दूसरों का मार्गदर्शन करने की चाह नहीं होती,,
अब अपने आपको देखो, आपसे कोई एक बात पूँछ ले, तो आप उसे, अपने जीवन के सारे अनुभव गिना दो, बस इसी विचारों के बोझ का अंतर होता है, एक बुद्ध और बुद्धजीवी मैं,,, बुद्ध स्वयं को साबित करने को, समय की हानि मानता है, और बुद्धिजीवी.,, स्वयं को साबित करने मैं, अपना पूरा समय और Energy फूंकने को तैयार रहता है

Types of Meditation | ध्यान के प्रकार

मैं ढोंगियों की तरह, घुमा फिरा के बात करके, स्वयं को “सिद्ध पुरुष” और आपको, अपना शिष्य बनाना नहीं चाहता, पर मैं क्या करूँ,,,आपकी बुद्धि इतनी जटिल हो गई है कि, बिना चमत्कारों की कहानी,, आपको आकर्षित भी तो नहीं करतीं,, फिर भी कह देता हूँ,,कोई भी ऐसी स्थिति, जो आपके विचारों के, अनियंत्रित बनने की प्रक्रिया को, बंद कर दे, वो सभी प्रक्रिया ध्यान ( Meditation ) ही हैं,

जैसे खेलना / डांस करना / गायन / घरेलू या ऑफिसियल काम भी हो सकते हैं, यानि ऐसी सभी क्रियाएं, जो आपके आंतरिक विचारों को, बंद कर देती हैं, ये सभी ध्यान ( Meditation ) प्रक्रिया ही हैं, ऐसे और भी उदहारण हैं जैसे –
कभी आपके सामने – सांप या शेर आ जाय, तो क्या ऐसी स्थिति मैं आप, विचार बना पाओगे ?
उत्तर – जब तक मृत्यु का भय रहेगा, तब तक नहीं,
तो समझ लो, वो भी ध्यान है, अर्थात आपका मन बंद हो गया
एक और बात, जब हम कुछ सीख रहे होते हैं, तो सीखने दौरान, विचार बनाना मुश्किल है, परन्तु जब उसमें निपुण हो जाते हैं, तो वही काम करते करते,, विचारों का बनना भी, शुरू हो जाता है, विचार बनाने की इसी प्रक्रिया को, अवचेतना भी कहा जाता है, ऐसे व्यक्ति जागरूकता से कोसों दूर रहते हैं, एवं भ्रम या अंधविश्वास के शिकार होते रहते हैं, दरअसल उनकी जागरूकता नष्ट हो जाती है, उन्हें जीवन मैं, किसी प्रकार का परिवर्तन भी, शोभा नहीं देता, स्त्रियाँ जोकि, अधिकतर घरों मैं रहती हैं, उन्हें सबसे ज्यादा, अवचेतना घेर लेती हैं

Loss of distractive mind | अवचेतना के नुक्सान

हालात ये हैं कि आजकल, ड्राइविंग करते हुए भी, हम लोग, विचार बनाने के आदी हो गए हैं, 90% दुघर्टनाओं का, यही ( विचार ) कारण है, हमारी माताएं बहिनें रोटी बनाते समय,, आग के पास खड़े होकर भी, अपने विचारों मैं, मगन हो जाती हैं,,, 20 बर्ष पहले तक, जब घरों मैं, गैस, वाशिंग मशीन या यातायात की, इतनी सुविधाएँ नहीं थीं, आसपड़ोस मैं अच्छे व्यवहार हुआ करते थे, तब स्त्री हों या पुरुष,, बहुत कम विचार बनाते थे, क्या ये सत्य नहीं कि, विचार ही अहम् मैं, परिवर्तित हो जाते हैं, हम अपने भीतर ही इतने व्यस्त हो जाते हैं, कि आखें खुली होने के बावजूद , सामने के दृश्यों को देख नहीं पाते,,

ऐसे Distractive Mind वाले घरों मैं, पुरुष तो प्राय: नशीले पदार्थों का सेवन करके, अपने दिमाग को सुन्न या शांत कर लेते हैं, परन्तु स्त्रियां मानसिक तौर पर असहाय हो जाती हैं, इसी के बाद वे, भ्रम और अंधविश्वासों के, जंजाल मैं फंस जाती हैं
– विचार बनाने की इसी प्रक्रिया को रोकने के लिए, बच्चों के लिए, खेल आवश्यक बताए हैं, परन्तु आजकल लाडले बच्चे Mobile App पर गेम खेलना पसंद करते हैं, जो बहुत बुरी बात है,,यदि देश के भविष्य की, सुरक्षा करनी हो तो,
इस बात पर, अभिभावक नहीं तो सरकारों को, कोई सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है,, मैं फिर एक बात को दोहरा रहा हूँ, पुरुषों मैं नशीले पदार्थों की लत, लगने का मुख्य कारण भी, अपने अनियंत्रित विचारों से, निजात पाना ही है,, और ये बात, शायद उन्हें पता भी नहीं, कि नशा उन्हें क्या आराम देता है

Google जैसी, लोभी कंपनियां, 6 साल के बच्चों को, Computer language सिखा रही हैं, इसमें कुछ मातापिता बेशक, गर्व की अनुभूति करें, परन्तु सोचें, बच्चों से उनका बचपन छीनकर, उनके मासूम दिमाग को, यादों के बोझ से लादकर, उन्हें पैसे कमाने की मशीन बनाकर, आप उनके जीवन के साथ, कितना बड़ा अन्याय करने जा रहे हो,,ऐसे बच्चोँ के भविष्य का क्या होगा, जो 20 बर्ष की आयु तक,बुड्ढे हो जायेंगे, ऐसे फल कितने मीठे होते हैं जिन्हें हम, पकने से पहले तोड़ देते हैं ? बिना अनुभव के व्यक्ति और बिना ऋतुओं के फल, किसी को क्या लाभ देंगे

इतना लम्बा लेख, बार बार घुमा घुमा के उदाहरण देने का, मेरा अभिप्राय यही था, कि किसी न किसी एंगल से, आपके दिमाग मैं बैठे, कि मैं क्या कहना चाहता हूँ, एक न एक उदाहरण, आपके मन (Internal Storage ) मैं उसी तरह बैठ जाए जैसे, अहम् भरी बातें, बैठती हैं, और बर्षों बदले के भाव मैं, उन्हें याद कर कर के जीते रहते हो,,यहाँ तक आपको स्पष्ट हो गया हो कि Meditation क्या है, तो नीचे लिंक पर Click करके, Meditation करने की सभी सरल प्रक्रियाएं जान लो, ये प्रक्रियाएं आपको रोज 10 मिनट,,, और 10 दिन तक करनी हैं, उसके बाद आप स्वयं को, जागरूकता के कितने नजदीक महसूस करोगे, ये अंदाजा लगा पाना मुश्किल है

ऊपर के लेख को, यदि आपने ध्यान से पढ़ा होगा, तो आप समझ गए होंगे, कि ध्यान लगाना ( Meditation )जो शब्द है, वो आपके ध्यान से सम्बंधित, साधारण शब्द ही है,,, इसे किसी चमत्कार से न जोड़ें, जब आप अपने मन को नियंत्रित कर लेते हैं, तब आपके ध्यान देने ( concentration ) की, क्षमता बढ़ जाती है,

ध्यान लगाने ( Meditation ) की जो क्रियाये हैं, हम उन पर चर्चा करेंगे, सबसे पहले तो ये समझ लीजिये, कि कोई “Dharmguru” आपको, कोई भी क्रिया करने को कहे,,, किसी भी तरह बैठकर / लेटकर / या खड़े होकर,,, उन सभी क्रियाओं मैं, एक बात जो सबसे मुख्य है, वह यही है, कि आपको अपने अनियंत्रित विचारों को रोकना है, इसके लिए वे आपसे, आपका ध्यान, स्वविचारों से migrate करके, कहीं और लगाने को कहेंगे, चाहे अपनी सांसों पर / मोमबत्ती पर / ball पर /नाक पर / या किसी आवाज पर

Om meditation

Om meditation, ॐ एक प्राकर्तिक शब्द है, ओम मैं तीन शब्दों का प्रयोग होता है , अ + उ + म तीनों शब्दों को मिलाकर ॐ कहा जाता है, शब्द आत्मा के 3 मूलभूत गुणों अर्थात – जन्म + कर्म + और अकरम का परिचायक, आज के आधुनिक युग मैं, कई सैटेलाइटों के द्वारा, ये पता लगाया गया है , पृत्वी से 200 किलोमीटर ऊपर पहुँचने के बाद, जब पूरे ब्रह्मण्ड मैं, ये शुद्ध ध्वनि सुनाई देती है, जबकि पृथ्वी पर, अनेक विशुध्द ध्वनियों के कारण, हम इसे नहीं सुन पाते, वैज्ञानिकों द्वारा किये गए शोधों के अनुसार, ॐ शब्द के उच्चारण से, हमारे शरीर के कई, भौतिक या भावनात्मक अंगों पर विशेष प्रभाव पड़ता है, यहाँ तक कि इससे कई प्रकार के वायरस बीमारियों को भी ठीक किया जा सकता है, और दिमाग मैं ॐ जाप का वैज्ञानिक शोध जानें

Breathing meditation

breathing meditation के माध्यम से भी, आपको यही समझाने का प्रयास किया जाता है, कि अपने विचारों को, विराम देकर, अ बुद्धि को, अपनी सांसों पर लगायें, जब आपको कहा जाता है, कि अपनी सांसों को, मूलाधार चक्र से शुरू करके सहस्त्राण चक्र तक लाएं, वहां आपका मन (Internal Storage) का काम बंद हो जाता है, क्योंकि ये विचार, आपके मन द्वारा बनाये जाते हैं, बुद्धि विचार नहीं बनाती, बुद्धि तो सावधानी पूर्वक, आपके वर्तमान कर्म पर केंद्रित हो जाती है, चाहे आप – गाना गायें, नृत्य करें, खेलें,, ऐसी अवस्था मैं, बुद्धि द्वारा ही काम लिया जाता है

Chakra healing meditation

Chakra healing meditation मैं, आप अपनी बुद्धि को, निर्देश देते है कि , रीढ़ की हड्डी के, अलग अलग पॉइंट पर Concentrate करे, Chakra healing meditation के माध्यम से, जब बुद्धि उन पॉइंट्स पर Concentrate करती है, ऐसी अवस्था मैं भी, आप अपने विचारों से मुक्त हो जाते

Mantra meditation

Mantra meditation मैं भी, व्यक्ति अपनी बुद्धि को, मंत्र के शब्दों पर लगाते हैं, इन शब्दों के उच्चारण से, जो ध्वनि उत्पन्न होती है, वह ध्वनि भौतिक और भावनात्मक दोषों पर, सकारात्मक प्रभाव उत्पन्न करती है,

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