Stress ( तनाव ), आज के समय मैं, तनाव एक ऐसा विषय है, जिसके कारण, पूरी पृथ्वी पर, प्रत्येक देश या समाज के, हर परिवार मैं, लगभग सभी व्यक्ति जूझ रहे हैं, बड़े बड़े देशों के, नामी वैज्ञानिक और,  डॉक्टर, सैकड़ों बर्षों से इस बिषय पर, हजारों प्रकार के, थयोरिकल और प्रैक्टिकल, शोध कर रहे हैं, पर ये परेशानी  है, कि  कम या ख़त्म होने, का नाम ही नहीं लेती, हजारों Writer,, लाखों किताबें भी लिख चुके हैं, पर कोई आराम नहीं, मेरे हिसाब से, बड़े बड़े वैज्ञानिक /डॉक्टर या Researcher, इस परेशानी का हल, जहाँ खोज रहे हैं, जिस गड्ढे को खोद रहे हैं, वहाँ इसका हल, है ही नहीं,, माफ़ कीजियेगा, मैं यहाँ किसी के प्रयासों को तुच्छ, और स्वयं को बुद्धिमान जताने का, प्रयास नहीं कर रहा,, मैं यहाँ प्रयास करूँगा, कि मैं अपने शोध,, और आपकी सोच को, एक साथ मिला सकूं, दोनों की सोच मिलने के बाद, हम एक दुसरे के सहायक बनकर, विश्व मैं क्रांति ला सकें, जिससे एक बार फिर, मेरे देश “भारत” का परचम, पूरे विश्व मैं लहराए, नीचे मैं आपको, जो बात, बताने जा रहा हूँ, यदि वह बात, आपके तर्कों पर, खरी उतरे, तो इस बात को, mouth to mauth फैलाएं,

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Awareness

Stress awareness | तनाव के प्रति जागरूकता

Mouth To Mounth बात करने से, या एक दूसरे को, हिम्मत प्रदान करने से, सबसे बड़ा फायदा, ये होगा, कि हमारे देश का भविष्य, देश के सभी युवा,, अपना Stress management कर सकेंगे, अपनी एकाग्रता बढ़ा सकेंगे, (एकाग्रता बढ़ाने के सटीक नुस्खे जानें ),

एक और ध्यान रखने योग्य बात,, किसी बात को पढ़कर या समझकर,उसे अधिक समय तक याद नहीं रख सकते, परन्तु एक बार बोलकर या सुनकर, उसे याद रखना, आसान हो जाता है, इसीलिए पुस्तकों मैं पढ़ी बातें, याद रखने से,, ज्यादा आसान होता है, उसका Picturization (Cinema ), यानि कि, आप इस बात को समझकर, जितना अधिक लोगों के साथ, साझा करेंगे, उसी तीव्रता से, आपमें (स्वयं ) जागरूकता आएगी, ये बात तो आपको पता ही है क़ि Stress, की शुरुआत, व्यक्ति के मस्तिष्क से शुरू होती है, तो हमें समझना पडेगा, कि हमारे दिमाग की सरंचना क्या है

Sources

दिमाग की सरंचना | Sources Of Stress

आपका दिमाग,, आपके शरीर का,, एक Physical part है, जोकि एक महत्त्वपूर्व Part है, ये हमारे अनुभवों और यादों को,, बहुत बड़ी मात्रा मैं, Store करके रखता है,,,परन्तु इसका मतलब ये नहीं, कि हम, शरीर का, सबसे महत्त्वपूर्ण हिस्सा मानें, इससे ज्यादा महत्त्वपूर्ण – बातों को, अनुभवों और यादों को,,, हमारा शरीर एकत्रित करके रखता है,
उदाहरण के तौर पर, यदि आप स्वनिरीक्षण करें, तो जानेंगे, कि जीवित रहने के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण काम है सांस लेना, यदि ये काम, हमारे दिमाग को दे दिया जाता, तो क्या ये दिमाग, इस जिम्मेदारी को बखूवी निभा पाता,,,,,? क्योंकि, जाग्रत अवस्था मैं,,कभी कभी, विचार बनाते समय, खुली आखों से भी,,,हम उन द्रश्यों को, नहीं देख पाते, जो हमारे सामने चल रहे होते हैं,,,यदि किसी और के साथ, ऐसा होता है, तब हम उससे, पूँछते हैं,,, कि तुम्हारा ध्यान कहाँ है, अब सोचो, साँस लेने जैसा, महत्त्वपूर्ण काम,,, अगर आपके दिमाग को, दे दिया जाता,,, तो विचार बनाते समय आप, सॉंस लेना ही भूल जाते, और सारी योजनाएं, धरी की धरी, रह जातीं,,ऐसे और भी उदाहरण हैं, जोकि इस लेख को, लम्बा करेंगे, जो मैं नहीं चाहता,,,तो चलिए अपने बिषय पर आते हैं

Hormones

Stress hormones | दिमाग मैं तनाव ग्रंथि

दिमाग मैं, तनाव की, कौन सी ग्रंथि है, और कहाँ स्थित होती है ? इसे समझने के लिए, आपको दिमाग के, अलग अलग भागों को समझना चाहिए, हमारे दिमाग के 16 भाग हैं, पर आप घबराइए नहीं, मैं यहाँ आपको, 16 नए नाम गिनवाना, नहीं चाहता, मैं जानता हूँ, आपके मन मैं, already ये चल रहा है कि, ये लेख, जल्दी से ख़त्म हो, तो चलिए, मैं यहाँ इसे दो भागों मैं बाँट देता हूँ,
पहला भाग है, आपकी बुद्धि, जो आपके माथे की ओर, आपकी पीनियल ग्रंथि के ठीक पीछे होती है, और दूसरा भाग है, आपका मन,,, जोकि आपकी गर्दन के, ऊपर वाला, सिर का भाग होता है, आपकी सारी यादें, यहीं Stor होती हैं, जैसा कि आप सभी जानते हैं, कि तनाव के दौरान, हमारे सिर मैं दर्द होता है, परन्तु ये दर्द कहाँ होता है, इसे समझने के लिए,,,नीचे पिक्चर देखिये

Stress management

बुद्धि और मन को जोड़ने के लिए. कुछ नसें, होती हैं, ये नसें ठीक उसी तरह, काम करती हैं, जैसे आपके घर मैं, एक कमरे से दूसरे कमरे तक, light पहुँचाने के लिए, Wiring (तारों का संग्रह), इन्हें stress hormones ( तनाव ग्रंथि )भी कहते हैं, अब सिरदर्द को समझिये, ये अत्यधिक विचार बनाने से, नसों पर पड़ने वाले, दवाब के कारण होता है,

परन्तु ये दर्द, 2 तरीके से होता, यदि आप अपने अग्रभाग (बुद्धि का अधिक प्रयोग करते हैं, तो ये दर्द आपको, सिर के पीछे वाले भाग (Internal Storage) की तरफ होगा, और यदि आप, अपने मन का, अधिक प्रयोग करते हैं, तो ये दर्द आपके सर के अग्रभाग, यानि माथे की तरफ होगा, नीचे के लेख मैं, दिमाग के दोनों भागों की, कार्यप्रणाली समझिये

Parts of Mind

दिमाग के भाग | Parts Of Mind

इसे समझने के लिए, अपने दिमाग को, शरीर के अन्य अंगों की तरह, एक साधारण अंग की तरह देखिये, दिमाग एक भौतिक हिस्सा है, जो आपमें भावनात्मक क्रियाएं उत्पन्न करता है , जैसे आपकी टीवी या Ac का रिमोट, एक भौतिक पार्ट है, परन्तु उसमें लगा सेंसर एक भावनात्मक प्रतिक्रिया है, जो बिना किसी Connection के, काम को अंजाम देती है, दिमाग के दोनों हिस्सों को ऐसे समझें

  1. इसका पहला भाग है, “बुद्धि” जोकि Creative है, तार्किक है, परिवर्तनशील है,
  2. और दूसरा भाग है, आपका “मन” जोकि Storage है, स्थिर है,, द्रढ़ है,

इसे और आसान बनाने के लिए,, अपने दिमाग की सरंचना को, Smart Phone की तरह समझें, आपका Phone, निम्न ‘2’ आधारों पर काम करता है

  1. पहला है, Internet Search Browser, (Google के अलावा, Bing, Yandex जैसे,बहुत सारे browser हैं )
  2. और दूसरा है, आपके फ़ोन का, Internal storage ( Memory )

यानि की, जब आप, पूरे दिन आप, अपने फ़ोन का उपयोग करते हैं,,, या तो, नयी नयी बातों को, जानने के लिए, अपने Search Browser का, प्रयोग करते हैं, या अपने फ़ोन के, Internal Storage मैं स्थित, फोटो, Mp3 वीडियो, आदि को सुनने, पढ़ने या देखने मैं,,इसी तरह हम भी, अपने पूरे जीवन मैं, दो आधारों पर ही, जीवन व्यतीत करते हैं,

  1. पहला आधार है, बुद्धि, जोकि जीवन मैं , विभिन्न प्रकार की, नई नई परिस्थितियों से निपटने, विभिन्न प्रकार के संघर्षों से, निजात पाने, नए नए संसाधनों के प्रयोगों को सीखने,, या इस्तेमाल करने हेतु,, उपयोग करते हैं
  2. दूसरा आधार है, मन, ये एक प्रकार का Store Room है, जिसमें हम, अपने जीवन मैं घटित, महत्त्वपूर्ण अनुभवों, निष्कर्षों, या जानकारियों को Store करके रखते हैं, स्वास्थ या शरीर के लिए उपयोगी, दैनिक क्रियाओं,, अच्छे विचार,, परम्पराओं या धारणाओं को भी,,, इसी मन मैं, Stor करके रखा जाता है,

लोगों के जीवन मैं, आज सबसे बड़ी परेशानी का कारण है, कि आजकल, अधिकतर लोग, अपनी बुद्धि का कम,, और मन का,,, अधिक प्रयोग करते हैं,,,जीवन मैं, बार बार, किसी काम को करने पर,, वह काम, व्यक्ति की, आदत मैं, जाता है, एक दिन वही आदत, उसका चरित्र बन जाती है, व्यक्ति का चरित्र ही, उस व्यक्ति के कर्म करने, और निर्णय लेने का, आधार बनता है, और ये सब हमारे दिमाग के, (Internal storage ) यानि “मन” वाले हिस्से का काम है,

Response

Stress response | तनाव की प्रतिक्रिया

तनाव के दौरान, हमारे शरीर के विभिन्न अंगों मैं, विभिन्न प्रकार के बदलाव आ जाते हैं, इसके बहुत सारे नुक्सान, देखने को मिलते हैं, जैसे अंगों का काँपना, कोई हिस्सा सुन्न पड़ जाना, ठीक से सुनाई या दिखाई न देना, भूलने की आदत पड़ जाना,
इसके अलावा भी दिल का दिमाग का दौरा आना, रक्तप्रवाह बढ़ जाना, वैसे माना जाय तो, तनाव की प्रतिक्रिया , हमारे भावनात्मक पहलुओं पर, बुरा असर डालती है, इससे हमारे मस्तिष्क मैं, डोपामीन नामक पदार्थ की कमी हो जाती है , ये वही पदार्थ है, जिसे हमारी पीनियल ग्रंथि, Produce करती है, जो हमारे मस्तिष्क मैं, प्रेम और उत्साह का, संचार करता है,
इसके इलाज के लिए, यदि आप किसी मनोचिकित्सिक से मिलेंगे, तो वह आपको, यही रटवायेगा कि आप ठीक हो, आप ठीक हो, और इससे आप स्वयं को, ठीक होता भी समझोगे, दरअसल न सिर्फ मनोचिकित्सा, बल्कि किसी भी बीमारी मैं, , दवाइयों से ज्यादा,,, इक्षाशक्ति ही, काम करती है, आप दवा लेते हो, तो मेहसूस करते हो, कि अब मैं ठीक हो जाऊंगा,,, इससे जल्द ही ठीक हो जाते हो, यदि किसी डॉक्टर ने आपको, कोई दवा भी दी हो, तो बता दूँ, ये दवाएं, सिवाय दिमाग को सुन्न करने के, और कुछ नहीं करती,

Actvities

Drug addiction | Stress relief activities |

कुछ लोग, जो लगातार विचार बनाने की इस प्रक्रिया से बहुत ज्यादा परेशान हैं, वे इस प्रक्रिया को, बंद करने के लिए, या इस दिमाग को, सुन्न करने के लिए ही, निकोटीन, एलकोहल या, सैकड़ों प्रकार की, नशीली दवाइयों का, सेवन करते हैं, जो शरीर को, और भी ज्यादा नुक्सान पहुँचातीं हैं, “नशेबाज” इस बात को, कभी समझ पाएं या नहीं, पर अब आप समझ लीजिये, लोग नशाबाजी इसलिए करते हैं, ताकि वे अपने मन ( Internal Storage ) की, लगातार विचार बनाने की, प्रक्रिया को, बंद कर सकें, अपने दिमाग को, सुन्न कर सकें, जैसे जैसे दिमाग सुन्न होता जाता है, उन्हें आराम मिलता जाता है, परन्तु ये तनाव का स्थायी उपचार नहीं है, नीचे हम Stress management अर्थात, तनाव के स्थायी उपचार की, बात करेंगे

ड्रग्स का सेवन करने या इसके अवैध धंधों मैं लिप्त अपराधियों के लिए, सरकार ने, Nov 2021 के, इसी संसद सत्र मैं, एक नए और सख्त कानून की घोषणा की है, नीचे बटन पर Click करके जानें

Memory creation

Stress is creation memory ? | क्या तनाव, स्मृति का सृजन है ?

पिछले कई दशकों से, विकास की ओर अग्रशील, संसार के सभी देशों मैं, विभिन्न प्रकार की विलासिताओं के साधन, बढ़ते जा रहे हैं, फिर चाहे वो भौतिक संसाधन हों, या भावनात्मक, हमारा दिमाग,,, हमारे कर्मों के प्रतिफल,,, या जरूरतों से,, कई गुना ज्यादा पाने की चाह रखता है, फिर ज्यादा पाने के, ऐसे विचारों को,, deep Store कर लेता है, इन विचारों को लेकर, बार बार तर्क करता है, इन्हें बार बार दोहराता है, इन्हें सपने सम्मान या अपमान से जोड़ता है, इस प्रक्रिया मैं, दिमाग की नसों पर बार बार, जो दबाव पड़ता है, दरअसल उसी दबाव या जोर को, हम तनाव के रूप मैं, महसूस करते हैं,,

तनाव की इसी प्रक्रिया को, आप मोबाइल की रैम (Ram ) की तरह, भी समझ सकते हैं, रैम अर्थात ( प्रोसेसिंग स्पीड, या प्रोसेसिंग पॉवर),, अभी कुछ बर्ष पहले तक, आपके मोबइल मैं, आधे, फिर 1 या 2 Gb की,, रैम (Ram ) आती थी, जिससे Online या Offline प्रोसेसिंग मैं, बहुत वक़्त लगता था, ज्यादा तीव्रता से, काम लेने पर, ये डिवाइस हैंग हो जाती थीं, या फिर Internal Storage मैं 60% से अधिक, Memory भर जाने पर, आपके फ़ोन, Hang हो जाया करते थे,

RAM का अर्थ होता, रैंडम एक्सैस मैमोरी, अधिक जानकारी लिए, लिंक पर क्लिक करें

अगर आप, Technical field से हों, तो समझ जायँगे, कि Browser मैं बार बार search करने से भी, आपके फ़ोन या लैपटॉप मैं, एक प्रकार की, Memory Create होती है, जो प्रोसेसिंग स्पीड को, Slow करती है, जिसके लिए हम, browser मैं, Search history, कैशिंग और कूकीज को, Delete करते हैं

वैज्ञानिकों द्वारा किये गए, कई प्रकार के शोधों के मुताबिक, एक नवजात शिशु के जन्म के समय, उसका मन (Internal Storage) बिलकुल blank होता है, जन्म लेने के 2 घण्टे के अंदर, शिशु अपने दिमाग मैं, कुछ सौ किलोबाइट (KB), मेमोरी Create कर लेता है, ये Memory उसमें, भूख के कारण, Create होती है, जन्म लेने के 6 घंटे के भीतर, इसकी क्षमता मेगाबाइट (MB), मैं पहुँच जाती है, जन्म के 6 माह मैं, ये अनुपात, लगभग 1 गीगाबाइट से अधिक हो जाता है, जिसमें उसे अपने आसपास के, लोगों के चहरे, अपने रहने का स्थान, अपने दैनिक उपयोग के बर्तन, कुछ खिलौने, सोने की जगह, सब याद रहता है,

शिशु मैं, 2 से 10 बर्ष तक, सबसे ज्यादा मेमोरी create होती है, लगभग 1200 टेराबाइट, आपने देखा होगा, इसी उम्र मैं, बच्चे सबसे ज्यादा प्रश्न बनाते हैं, उनकी बुद्धि मैं, बहुत सारे आश्चर्य होते हैं, ये आश्चर्य उनमें जिज्ञासा को जन्म देते हैं, इसलिए बच्चे, बहुत जल्दी जल्दी, सब कुछ जान लेना चाहते हैं, उन बिषयों पर अपनी राय देना चाहते हैं, आपको याद हो, इस उम्र मैं, आपके माता पिता ने कई बार, आपसे कहा होगा, कि बेटा – कम बोलना चाहिए

साधारण व्यक्ति का दिमाग, अपने जीवन मैं, 38 बर्ष लगातार, नयी नयी memory create करता रहता है, इंसान के दिमाग मैं, अधिकतम 2.67 पैटाबाईट क्षमता तक, Memory इकट्ठी की जा सकती है
1024 KB ( किलोबाइट ) = 1 MB
1024 MB ( मेगाबाइट ) = 1 GB ,
1024 GB ( गीगाबाइट ) = 1 TB
1024 TB ( टैराबाईट ) = 1 Petabyte

आज जहाँ, बचपन से ही आपके दिमाग मैं, परपम्पराओं, दैनिक और नैतिक क्रियाओं, शिक्षा और समाज जैसी, अनेकों प्रकार की, यादों को Store किया जाता है, इस कारण आपकी Memory का, लगभग 50 % हिस्सा, 25 बर्ष की उम्र तक ही, भर जाता है, जबकि अब से 30 – 40 बर्ष पहले तक, हमारे समाज मैं, इतने संसाधन और कम्पटीशन नहीं था, तब इसे 50 % भरने मैं, 50 बर्ष का समय लगता था, और 60 बर्ष की उम्र मैं, दिमाग का Internal Storage 60 – 70% हो जाने पर, ठीक आपके Smart Phone की तरह, आपके दिमाग मैं भी, Slow Processing, Hanging जैसी समस्याएं आती हैं, इन्हें आप, Stress का ही अन्य रूप कह सकते हैं

Types

Stress symptoms | Types of stress | तनाव के प्रकार | types of stressors

अब तक के लेख से, अब आप ये तो समझ ही गए होंगे, कि तनाव आपके मस्तिष्क मैं, अत्यधिक सोच के कारण, पैदा होता है, अर्थात किसी बात को, बार बार दोहराने से, पैदा होता है, आपके दिमाग के, internal Storage ( मन) मैं, Store किये विचारों का परिणाम है, इसके विभिन्न प्रकार हो सकते हैं, जैसे – भय, चिंता, आकांक्षा, विफलता, कुंठा, इत्यादि

Emotional stress symptoms | भावनात्मक तनाव के लक्षण

Stress अर्थात तनाव का एक कारण भावनात्मक तनाव भी है, किसी के द्वारा आपको भावनाओं के आहत होने पर भी, आप तनाव के माहौल मैं, पहुँच सकते हो, और ये भावनाएं तब आहत होती हैं, जब कोई व्यक्ति आपकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता, वो आपके द्वारा बनाये गए लक्ष्यों को, हासिल नहीं करता, क्या इसे आप मूर्खता नहीं कहेंगे कि,  लक्ष्य तय हम करें और , उन्हें कोई दूसरा प्राप्त करने का प्रयास करे, इसलिए कृष्ण ने कहा है, उम्मीदें ही दुःख का कारण हैं  

Negative stress | नकारात्मक तनाव के लक्षण | stress and depression

किसी कार्य को बड़े उत्साह से करना, और उस कार्य के विफल हो जाने पर, दुःख का अनुभव, ही negative stress कहलाता है, जीवन मैं सैकड़ों बार आपने विजय प्राप्त की, कई कार्यों मैं सफल हुए हैं, कुछ मैं विफल भी होंगे, विफलता से, depression का जन्म क्यों,, बल्कि काम करते मैं, रह गई कमी जानने के बाद, आपको बजाय, depress होने के, IMPRESS होना चाहिए, इसलिए फिर से प्रयास करें, क्योंकि किसी कार्य की शुरुआत मैं,  हमने अधिक उत्साह दिखाया था, शुरू से लेकर,  कार्य के अंत तक, हमारे फल प्राप्त करने की कामना ने ही, इस  Stress  (तनाव ) को जन्म दिया है, इसीलिए कृष्ण ने कहा है, कर्म करो, पर फल की चिंता मत करो

Exam stress | परीक्षा का तनाव

परीक्षा का तनाव ( exam stress) ,, जरुरी नहीं कि इस  स्थति से सिर्फ विधार्थी ही परेशान हैं, जीवन मैं रोज, हमें भी सैकड़ों परीक्षाएं देनी पड़ती हैं,
परीक्षा का,  ये तनाव,  मात्र हमारे भय से जन्म लेता है, हमें प्रत्येक उस बात पर भय लगता है, जिसके लिए, हम स्वयं को तैयार नहीं समझते, फिर चाहे वो Exam हों या interview, यहाँ आपको, या अभिभावकों समझ लेना चाहिए,  कि यहाँ सिर्फ आपके द्वारा की गई तैयारी  (योग्यता) की परीक्षा है, किसी अन्य के साथ, कोई प्रतिष्पर्धा नहीं, इसलिए भविष्य के भय की, परिकल्पना न करें,

Financial stress | पैसे की चिंता | वित्तीय तनाव

पूरी दुनिया मैं, आजकल सर्वाधिक तनाव का कारण, इस कारण का, दूसरा रूप ये भी हैं, कि लोग इसे, न चाहते हुए भी, प्रतिष्पर्धा के रूप मैं लेने लगे हैं, इसलिए ये सबसे बड़ा Stress बन गया है, सोचो जीविका के लिए, पैसा कमाना है, या पैसे के लिए जीविका चलानी हैं, लोग हमेशा उस चीज के प्रति चाह रखते हैं, जो उनके पास सबसे कम हो, उदाहरण – थोड़ी देर के लिए, अपनी नाक बंद करो, फिर स्वयं से पूंछो, सांस चाहिए या पैसा, जवाब आएगा सांस
पैसा इकठ्ठा करने का, मुख्य अभिप्राय है, व्यक्ति समाज मैं सम्मान पाना चाहता है, पर पसे के पीछे,  पूरी उम्र की मेहनत करने के  बाद, उसे अंत मैं, समझ आता है, कि उसे सम्मान को कमाना चाहिए था,

Workplace stress | कार्यस्थल तनाव | work pressure

व्यक्ति जिस माहौल मैं, रहता है, उसके दिमाग मैं, वैसे ही विचार पनपते रहते हैं, उदाहरण – यदि आप किसी पार्टी मैं जाओगे, तो दिमाग मैं, डोपामीन की मात्रा बढ़ जाएगी, इससे सुख की अनुभूति होगी, और किसी की, उठावनी मैं जाओगे, तो अपनी मृत्यु का भय बन जाएगा, इसी तरह कार्यस्थल (ऑफिस ) मैं रहने पर, अधिक काम करने के विचार, बनते रहते हैं, इसीलिए व्यक्ति के ऑफिस और घर को, अलग अलग रखा जाता है, वरना घर मैं रहकर,  काम करने वाला व्यक्ति, अधिक तनाव ग्रस्त महसूस करेगा

Acute stress | तीव्र तनाव

तीव्र तनाव इसका अत्यत्र नाम क्रोध भी है, इसका  कारण है , धैर्य की कमी, जो व्यक्ति अधिक उत्साही होते हैं, उनके भीतर धैर्य की कमी हो जाती है, धैर्य की कमी, उन लोगों मैं पायी जाती है, जिनको जीवन के, कम अनुभव होते हैं, जिनका जीवन संघर्ष रहित होता है, इसलिए अभिभावकों से, अनुरोध है, कि आप चाहे कितने भी धनी हों, परन्तु अपने बच्चों के जीवन मैं, संघर्ष का मार्ग अवश्य प्रशस्त करें, उनकी हर इक्षा को, आसानी से पूरा कर देने पर, उनमें acute stress अर्थात क्रोध बढ़ जायेगा, क्रोध ही बुद्धि के विनाश का कारण है

ऐसे अनेक कारण, जिनको हम, अपने Internal Storage ( मन ) मैं, महत्त्वपूर्ण बात समझकर, Store कर लेते हैं, अपने भीतर लगातार, विचार बनाते रहते हैं, क्योंकि पिछले कुछ बर्षों मैं, जैसे जैसे व्यक्ति, बाहरी दुनिया से, बिछुड़ता जा रहा है, उसमें ज्ञान ( जानकारी )की कमी हो रही है, और स्वयं को जरूरत से अधिक, महत्त्वपूर्ण समझता जा रहा है, जो कि मूर्खता है, परन्तु ध्यान रहे – संसार मैं, जो व्यक्ति अपने आपको, महत्त्वपूर्ण नहीं समझता, उसी के हाथों द्वारा, इस संसार मैं, महत्त्वपूर्ण कार्यों की, स्थापना होती है

Relief

Stress counselling | to relieve stress | तनाव से राहत

अब आप समझ गए होंगे, कि आपके Stres का कारण है, आपका Internal Storage, यानि आपकी यादें, यही कारण हैं कि एक बालक, जो व्यस्क की क्षमता बहुत कम Memory को Store करता है, वो किसी अधेड़ उम्र के व्यस्क मुक़ाबले, ज्यादा खुशहाल जीवन व्यतीत करता है, उसका चेहरा प्रफुल्लित / खिलता हुआ दिखाई देता है, जबकि अधिक यादों के संग्रहण के कारण, आपके चहरे दुखी और लटके हुए, प्रतीत होते हैं

जैसा मैंने शुरुआत मैं कहा था, की हमारे वैज्ञानिक /डॉक्टर /शोधकर्ता, इसे भौतिक शरीर की, समस्या समझकर इसे सुलजाने का प्रयास कर रहे हैं, दरअसल वो गलत जगह गड्ढा खोद रहे हैं, क्योंकि इसका समाधान किसी भौतिक क्रिया से नहीं, अपितु भावनात्मक क्रियाओं से जुड़ा है,
अर्थात यदि आपकी यादों को संकुचित (Compress) कर दिया जाए, अनवांछित यादों को, Reduce या delete कर दिया जाय, तो आपका Stress ख़त्म हो सकता है, परन्तु क्या ये इतना आसान है ?

तो मैं कहना चाहूंगा, सबसे कठिन कार्य होता है, संकल्प लेना, संकल्प से अधिक, कोई कठिन कार्य नहीं, आपने देखा होगा, कि आजकल के युवा, कोई संकल्प नहीं लेना चाहते, ये उनकी कमजोरी की निशानी है,

लोगों मैं, Stress नाम की समस्या, अभी कुछ बर्षों से नहीं, बल्कि पृथ्वी पर, जीवन की शुरुआत से है, लगातार किसी बिषय पर, गहनशीलता या विचार करने से, व्यक्तियों का दिमाग तार्किक बन जाता है, इसीलिए लाखों बर्ष पहले ही, हमारे वैज्ञानिकों / डॉक्टरों ने, इस समस्या का इलाज खोज लिया था, जी हाँ इसका इलाज है, “ध्यान” विधि के द्वारा, आप अपने विचारों को, Compress का सकते हैं
अगर आप, अपनी सुविधानुसार, मात्र 10 दिन के लिए, प्रत्येक दिन, 5 से 10 मिनट का समय, अपने लिए निकाल सकते हैं, तो बड़े आराम से, अपने Stress को ख़त्म कर सकने मैं, सफल होंगे,

परन्तु समाज का 95 % वर्ग ये जानता ही नहीं, कि ध्यान कैसे करते हैं, जब लोग खुद नहीं जानते, तो अपने बच्चों को क्या सिखा पाएंगे, इसलिए ये समस्या पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ती जा रही है, यदि आप भी नहीं जानते ध्यान क्रिया क्या है, कैसे करते हैं, और आँख बंद करते ही विचारों की लम्बी फेरहिस्त आपके दिमाग को घेर लेती है, तो नीचे दिए बटन ( ध्यान की विधि ) पर क्लिक करके, ध्यान की सरल प्रक्रिया जानें
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घूमने के शौक़ीन लोगों के लिए, भारतीय रेलवे का नया कदम, अब Irctc के पैकेज मैं, न सिर्फ यात्रा बल्कि खाने पीने और रहने का भी इंतजाम किया जायेगा, Ac Train, Ac hotel और Ac Cab, वो भी सरकारी रेटों पर, नीचे बटन पर क्लिक करके,, अपना पसंदीदा स्थल और उसके पैकेज की पूरी जानकारी प्राप्त करें

धर्म का अर्थ, यदि पूजा पाठ, जप – तप या कठोर नियमों का पालन करना होता, तो ये काम तो, दैत्य, असुर और राक्षस भी करते हैं, प्राचीन काल मैं, ये राक्षस, मनुष्यों से भी कठोर उपासना विधियों का, प्रयोग करते थे, तो क्या हम ये मानें की वे सभी धार्मिक थे, यदि ऐसा नहीं है, तो हम सभी स्वयं को, धार्मिक क्यों समझ लेते हैं ?, आइये धर्म का सही अर्थ जानने के लिए, बटन पर क्लिक करें

6 thoughts on “Stress management कैसे करें ?”

  1. BILKUL SATYA VACHAN BINA KOI SANKALP LIYE AUR STRESS KE SATH HUM KABHI AAGE NH BAD SAKTE..AAPKA AABHAR JO HAME ITNI JARURI AR GYAN KI BATE BATAYI..

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